परीक्षा की तैयारी कैसे शुरू करें?
विशेष शिक्षा लेख | अनामिका झा | Why News 24/7
परीक्षा का नाम सुनते ही कई विद्यार्थियों के मन में तनाव, डर और चिंता पैदा होने लगती है। इसका असर केवल पढ़ाई पर ही नहीं पड़ता, बल्कि नींद, खान-पान, एकाग्रता और आत्मविश्वास पर भी दिखाई दे सकता है। कई बार बच्चे परीक्षा की तैयारी से ज्यादा इस बात को लेकर चिंतित रहने लगते हैं कि उनके कितने अंक आएंगे, माता-पिता क्या कहेंगे या दूसरे बच्चों से उनका प्रदर्शन कैसा रहेगा।
लेकिन परीक्षा को लेकर तनाव होना और तनाव को अपने ऊपर हावी होने देना — दोनों अलग बातें हैं।
बच्चों को परीक्षा के समय केवल अधिक पढ़ाई की जरूरत नहीं होती। उन्हें सही दिशा, समय का प्रबंधन, नियमित अभ्यास और सबसे बढ़कर परिवार के सहयोग की जरूरत होती है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए अनामिका झा ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए परीक्षा की तैयारी से जुड़े कुछ सरल और व्यावहारिक सुझाव साझा किए हैं।

परीक्षा की तैयारी केवल किताब खोलकर बैठने का नाम नहीं
परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले विद्यार्थी को यह समझना जरूरी है कि उसे क्या पढ़ना है, कितना पढ़ना है और किस विषय को कितना समय देना है।
हर विद्यार्थी की पढ़ने और समझने की क्षमता अलग होती है। इसलिए किसी दूसरे विद्यार्थी की दिनचर्या को हूबहू अपनाने के बजाय अपने लिए व्यावहारिक अध्ययन योजना बनाना अधिक उपयोगी हो सकता है।
सभी विषयों को समय दें
अक्सर विद्यार्थी अपने पसंदीदा विषय को ज्यादा समय देते हैं और कठिन विषयों को टालते रहते हैं। इससे परीक्षा नजदीक आने पर कठिन विषयों का दबाव बढ़ जाता है।
इसलिए सभी विषयों को पर्याप्त समय देना चाहिए और जिन विषयों में अधिक कठिनाई महसूस होती है, उनके लिए अतिरिक्त समय निर्धारित करना चाहिए।
टाइम मैनेजमेंट है परीक्षा की तैयारी की कुंजी
लंबे समय तक किताब के सामने बैठे रहना जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि पढ़ाई का समय सही तरीके से इस्तेमाल हो।
एक व्यावहारिक टाइम टेबल बनाया जा सकता है, जिसमें:
- सभी विषयों को पर्याप्त समय मिले।
- कठिन विषयों के लिए अतिरिक्त समय रखा जाए।
- पढ़ाई के बीच छोटे ब्रेक हों।
- रिवीजन के लिए अलग समय रखा जाए।
- लिखकर अभ्यास करने का समय भी शामिल हो।
टाइम टेबल ऐसा होना चाहिए जिसे विद्यार्थी वास्तव में अपना सके। बहुत कठिन या अव्यावहारिक टाइम टेबल कुछ दिनों बाद बोझ बन सकता है।

पढ़ते समय मोबाइल और टीवी से दूरी जरूरी
आज विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक लगातार आने वाले डिजिटल distractions हैं।
पढ़ाई के दौरान मोबाइल फोन, टीवी और सोशल मीडिया का ध्यान भटका सकता है। इसलिए जिस समय पढ़ाई करनी हो, उस दौरान अनावश्यक notifications बंद रखना और मोबाइल को कुछ समय के लिए दूर रखना उपयोगी हो सकता है।
अगर पढ़ाई के लिए फोन की आवश्यकता है, तो केवल जरूरी educational apps या resources का इस्तेमाल करें और बाकी distractions से बचें।
रटने के बजाय समझने पर दें जोर
परीक्षा की तैयारी में केवल उत्तर याद कर लेना हमेशा पर्याप्त नहीं होता।
विद्यार्थियों को कोशिश करनी चाहिए कि वे किसी विषय को पहले समझें और फिर उसे अपनी सरल भाषा में दोहराने का प्रयास करें।
जब किसी concept को समझकर पढ़ा जाता है, तो उसे याद रखना और परीक्षा में अपने शब्दों में समझाना आसान हो सकता है।
अनामिका झा की सलाह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि बच्चों को केवल रटने के बजाय समझने और सरल भाषा में लिखने की आदत विकसित करनी चाहिए।
छोटे-छोटे नोट्स बनाएं
पूरी किताब बार-बार पढ़ने के बजाय महत्वपूर्ण बिंदुओं के छोटे नोट्स बनाना revision के समय काफी उपयोगी हो सकता है।
विद्यार्थी अपने notes में:
- महत्वपूर्ण definitions
- formulas
- dates या facts, जहां जरूरी हों
- headings
- difficult concepts
- महत्वपूर्ण keywords
लिख सकते हैं।
महत्वपूर्ण points को highlight करने से revision के दौरान उन्हें जल्दी पहचानने में मदद मिल सकती है।

पढ़कर नहीं, लिखकर भी करें अभ्यास
परीक्षा में केवल जानकारी याद होना पर्याप्त नहीं है। उसे समय के भीतर सही तरीके से लिखना भी जरूरी है।
इसलिए जो भी विषय पढ़ें, उसे समय-समय पर बिना देखे लिखने का अभ्यास करें।
इससे विद्यार्थी को यह समझने में मदद मिलती है कि उसे वास्तव में कितना याद है और किन हिस्सों को फिर से पढ़ने की जरूरत है।
लिखकर अभ्यास करने से उत्तर प्रस्तुत करने की शैली और समय प्रबंधन पर भी काम किया जा सकता है।
सुबह पढ़ना जरूरी है या नहीं?
कुछ विद्यार्थियों को सुबह का शांत वातावरण पढ़ाई और revision के लिए सुविधाजनक लगता है, जबकि कुछ विद्यार्थी दिन के दूसरे समय बेहतर concentration के साथ पढ़ पाते हैं।
इसलिए किसी एक समय को सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य मानने के बजाय अपने शरीर, नींद और concentration के अनुसार पढ़ाई का समय तय करना बेहतर है।
सबसे महत्वपूर्ण बात है कि विद्यार्थी पर्याप्त आराम और नियमित नींद को नजरअंदाज न करें।
लिखावट भी परीक्षा में महत्वपूर्ण है
अनामिका झा विद्यार्थियों को साफ और व्यवस्थित लिखावट पर भी ध्यान देने की सलाह देती हैं।
उत्तर पुस्तिका में:
- लिखावट स्पष्ट हो।
- उत्तर व्यवस्थित तरीके से लिखा जाए।
- जहां आवश्यक हो वहां headings का इस्तेमाल किया जाए।
- बहुत ज्यादा काट-कूट से बचा जाए।
- प्रश्न के अनुसार उत्तर दिया जाए।
साफ प्रस्तुति से examiner के लिए उत्तर को पढ़ना आसान हो जाता है।
हालांकि केवल सुंदर handwriting ही अच्छे अंक की गारंटी नहीं है। उत्तर की correctness, relevance और presentation सबसे महत्वपूर्ण हैं।
परीक्षा हॉल में क्या ध्यान रखें?
परीक्षा के दिन जल्दबाजी से बचना भी तैयारी का हिस्सा है।
विद्यार्थी को अपने संबंधित बोर्ड या परीक्षा की आधिकारिक instructions पहले से देख लेनी चाहिए और उसी के अनुसार जरूरी सामान तैयार रखना चाहिए।
आम तौर पर आवश्यक stationery और documents पहले से तैयार रखना उपयोगी होता है, जैसे:
- आवश्यक writing instruments
- pencil और eraser, जहां आवश्यक हो
- admit card या परीक्षा से संबंधित आवश्यक document
- permitted stationery
- पानी की बोतल, यदि परीक्षा के नियम इसकी अनुमति देते हों
महत्वपूर्ण: अलग-अलग बोर्ड और परीक्षाओं के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए परीक्षा केंद्र पर ले जाने वाले सामान के बारे में हमेशा संबंधित परीक्षा की आधिकारिक instructions को प्राथमिकता दें।
परीक्षा में ज्यादा कट-कूट से बचें
उत्तर लिखते समय गलती होना स्वाभाविक है। लेकिन बहुत ज्यादा काट-कूट उत्तर पुस्तिका को अव्यवस्थित बना सकती है।
इसलिए उत्तर लिखने से पहले प्रश्न को ध्यान से पढ़ें और जितना संभव हो सोच-समझकर उत्तर लिखें।
अगर गलती हो जाए तो संबंधित परीक्षा के नियमों के अनुसार उसे साफ तरीके से सुधारें।
हर प्रश्न का उत्तर देने से पहले निर्देश पढ़ें
“सभी प्रश्नों के जवाब देना चाहिए” जैसी सामान्य सलाह देने के बजाय विद्यार्थियों को यह समझना जरूरी है कि प्रश्नपत्र के instructions सबसे पहले पढ़ें।
कई परीक्षाओं में internal choices या निर्धारित संख्या में प्रश्नों का उत्तर देने के निर्देश हो सकते हैं।
इसलिए:
प्रश्नपत्र पढ़ें → instructions समझें → प्रश्नों का चयन करें → समय के अनुसार उत्तर लिखें।
कठिन विषय से भागें नहीं
किसी विषय को कठिन मानकर लगातार टालते रहना परीक्षा के समय तनाव बढ़ा सकता है।
अगर कोई chapter या subject कठिन लगता है, तो उसे छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ें।
उदाहरण के लिए:
Concept → Example → Practice → Revision
इस तरीके से विद्यार्थी धीरे-धीरे कठिन विषय पर confidence विकसित कर सकता है।
परीक्षा के दौरान माता-पिता की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण
परीक्षा का तनाव केवल विद्यार्थी को नहीं होता। कई बार माता-पिता भी बच्चे के परिणाम को लेकर चिंतित रहते हैं।
लेकिन यही चिंता अनजाने में बच्चे तक पहुंच सकती है।
बच्चों को बार-बार यह कहना कि “इतने नंबर लाने ही हैं” या दूसरे बच्चों से उनकी तुलना करना उनके तनाव को बढ़ा सकता है।
इसके बजाय माता-पिता को बच्चे को यह महसूस कराना चाहिए:
“तुम मेरे लिए बहुत खास हो। तुम्हारा परिणाम महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन तुम उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो।”
बच्चे के प्रयास की सराहना करना और असफलता या गलती के समय उसका साथ देना परीक्षा के दौरान उसके आत्मविश्वास के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से न करें
हर विद्यार्थी की learning speed, interest और strength अलग होती है।
इसलिए:
- “शर्मा जी का बेटा इतना पढ़ता है…”
- “तुम्हारे दोस्त के ज्यादा marks आएंगे…”
- “तुम्हें इतना तो करना ही पड़ेगा…”
जैसी तुलना बच्चों में अनावश्यक pressure पैदा कर सकती है।
बेहतर सवाल यह हो सकता है:
“आज तुमने क्या सीखा?”
या:
“किस topic में तुम्हें मेरी मदद चाहिए?”
इस तरह बातचीत परिणाम के बजाय learning और improvement पर केंद्रित रहती है।
पढ़ाई के कमरे का माहौल भी रखें व्यवस्थित
पढ़ाई के लिए एक साफ, शांत और व्यवस्थित जगह बनाना concentration के लिए मददगार हो सकता है।
Study table पर केवल जरूरी चीजें रखें। किताबें, stationery और notes व्यवस्थित रखें ताकि पढ़ाई के बीच अनावश्यक चीजें खोजने में समय न जाए।
कमरे की सफाई और organization को एक छोटे routine का हिस्सा बनाया जा सकता है।
जो विद्यार्थी relaxation या meditation जैसी practices पसंद करते हैं, वे पढ़ाई से पहले कुछ मिनट शांत बैठने, breathing exercise या meditation का अभ्यास भी कर सकते हैं।

Medihertz Frequencies पर उपलब्ध study-support और focus-oriented tools को विद्यार्थी अपनी व्यक्तिगत routine के साथ optional resources के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें exam preparation के लिए EXAM AI, self-reflection के लिए MBTI Personality Test, meditation/focus routine के लिए Frequency Tools और study environment को व्यवस्थित करने के लिए Room Energy Reset Tool शामिल हैं।
इन tools को पढ़ाई का विकल्प नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की अपनी study routine को व्यवस्थित करने वाले अतिरिक्त resources के रूप में देखा जाना चाहिए।
परीक्षा से पहले आखिरी समय में क्या करें?
परीक्षा के बिल्कुल पहले पूरा syllabus दोबारा शुरू करने के बजाय revision को प्राथमिकता देना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
आखिरी चरण में:
- बनाए गए short notes देखें।
- महत्वपूर्ण topics revise करें।
- पहले किए गए questions दोबारा देखें।
- कठिन concepts को एक बार फिर समझें।
- बहुत देर रात तक जागने से बचें।
- अगले दिन के लिए आवश्यक सामान तैयार रखें।
अंतिम समय में नई चीजों का बहुत अधिक बोझ लेने के बजाय जो पढ़ा जा चुका है उसे व्यवस्थित करना बेहतर हो सकता है।

परीक्षा के दिन घबराहट हो तो क्या करें?
कभी-कभी पूरी तैयारी के बावजूद परीक्षा हॉल में बैठते ही घबराहट महसूस हो सकती है।
ऐसी स्थिति में कुछ क्षण शांत होकर सामान्य सांस लेने पर ध्यान दिया जा सकता है। प्रश्नपत्र को जल्दी-जल्दी हल करने के बजाय पहले instructions पढ़ें और प्रश्नों को समझें।
अगर कोई प्रश्न तुरंत याद नहीं आ रहा है, तो उस पर जरूरत से ज्यादा समय खर्च करने के बजाय उपलब्ध नियमों के अनुसार आगे बढ़ना और बाद में वापस आना उपयोगी हो सकता है।
परीक्षा केवल नंबरों का नाम नहीं
परीक्षा निश्चित रूप से विद्यार्थी की मेहनत और तैयारी को परखने का एक माध्यम है, लेकिन यह किसी बच्चे की पूरी क्षमता या भविष्य को परिभाषित नहीं करती।
एक विद्यार्थी किसी एक विषय में अच्छा हो सकता है और दूसरे में संघर्ष कर सकता है। किसी परीक्षा में अपेक्षा से कम अंक आने का मतलब यह नहीं है कि वह बच्चा जीवन में सफल नहीं हो सकता।
इसलिए परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ बच्चों में आत्मविश्वास, curiosity, problem-solving और सीखने की आदत विकसित करना भी जरूरी है।
सलाह का सार
परीक्षा की तैयारी को अगर कुछ सरल बातों में समझें तो विद्यार्थियों को:
समझकर पढ़ना चाहिए।
समय का सही प्रबंधन करना चाहिए।
छोटे notes बनाने चाहिए।
नियमित revision करना चाहिए।
लिखकर अभ्यास करना चाहिए।
कठिन विषयों को टालना नहीं चाहिए।
मोबाइल और अन्य distractions से दूरी रखनी चाहिए।
उत्तर साफ और व्यवस्थित तरीके से लिखना चाहिए।
परीक्षा के official instructions को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
और सबसे जरूरी — अपने ऊपर अनावश्यक pressure नहीं डालना चाहिए।
वहीं माता-पिता के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश शायद यही है कि बच्चे को केवल उसके marks से न देखें।
उसे यह भरोसा दें कि मेहनत, सीखने की प्रक्रिया और उसका मानसिक संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
परीक्षा एक पड़ाव है, पूरी जिंदगी का फैसला नहीं।
लेखक के बारे में
अनामिका झा ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए परीक्षा की तैयारी, अध्ययन की आदतों, समय प्रबंधन और परीक्षा के दौरान सकारात्मक वातावरण से जुड़े ये सुझाव साझा किए हैं।
संपादकीय नोट: इस लेख में परीक्षा संबंधी सामान्य सुझाव दिए गए हैं। किसी विशेष बोर्ड या परीक्षा के नियमों, permitted items या examination instructions के लिए संबंधित बोर्ड/परीक्षा की आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता दें।